first हिन्दी (HINDI) post at straight points...

shared by straight point on Sunday, November 16, 2008

the wait is over...finally...

thanks for showing so much interest and curiosity...for whats going to happen at Straight Points... as i told you this idea was spinning in my mind for quite a while and must say here that inspiration came from none other than my friend and fellow blogger soulberry of TCWJ...when one fine moment we were discussing about indian culture and how he makes it a point to promote it through various mediums in whatever capacity he can...

his latest post on 'i am proud to belong to the third world' is the case in point...its as much about india as it is about cricket...thanks soulberry for enlightening and inspiring at least one soul...

now without taking much space...let me introduce you to the new entrant of blog world...

संजय अवस्थी...उर्फ़ 'किंका '

...and here is what he has to say...

हिन्दी राष्ट्र में हम परदेशी भाषा को तरझी देते आए हैं। देनी भी चाहिए, वक्त का तकाज़ा भी यही है।

वक्त बदलता गया, समय ने करवट ली और पराई भाषा को हमें अपनाना पड़ा।

हम अपनी परम्परा, संस्कृति को बनाये रखें, इसके लिए वाकयुद्ध तो होते रहते हैं, परन्तु अमली जामा नही पहनाया जाता। इसके लिए हमें स्वयं जिम्मेदारी ले लेनी चाहिए।

यहाँ यह स्पष्ट कर दूँ के मैं इस भाषा का विरोधी कतई नही हूँ। पढता भी हूँ और बोल भी लेता हूँ, परन्तु अपनी मात्रभाषा का इससे कम आंकलन होते हुए भी नही देख सकता।

राष्ट्र भाषा के प्रति प्रेम के मेरे इस होंसले को और भी बुलंद किया मेरे अन्तरंग मित्र और जानेमाने क्रिकेट ब्लॉगर स्ट्रेट पॉइंट' के संचालक पंकज शर्मा ने, जिन्होंने मुझे केवल प्रोत्साहित ही नही किया बल्कि प्रेरित भी किया की मैं भी आपके ब्लॉग परिवार से हिन्दी भाषा के माध्यम से स्वयं को जोडूं।

मुझे पंकज का सुझाव प्रेनादायी होने के साथ-साथ चुनोतीपूर्ण भी लगा, क्योंकि भले ही उन्हें मुझे यह सुझाव देना सहज लगा हो, परन्तु मेरे लिए यह एक कठिन काम है। मैं यह छोटा सा प्रयास कर रहा हूँ की स्वयं को आप से जोड़ सकूँ। क्योंकि मैं क्रिकेट ब्लॉग परिवार से जुड़ने की कोशिश कर रहा हूँ, तो समय-समय पर अपने संस्मरण व लेखआपके समक्ष परोसता रहूँगा।

कहते हैं प्यार करने की कोई उमर नही होती। मुझे भी प्यार हुआ था...क्रिकेट से। शायद १९८३ के वर्ल्ड कप से।

रेडियो का प्रचलन ज्यादा था क्योंकि उन दिनों या तो गिने चुने मैच ही टीवी पर प्रसारित होते थे या होते ही नही थे...खैर जो भी था, परन्तु रेडियो पर तो मैच प्रसारित होता ही था।
'

उस
समय सर्वश्री मुरली मनोहर मंजुल जी और जसदेव सिंह जी हिन्दी में कमेंट्री किया करते थे। ये दोनों हिन्दी भाषा के महारथी थे। इनकी स्वरमाला, भाषा पर पूर्ण नियंतरण, विषय का ज्ञान और अविरल भाषा प्रवाह नीरस से नीरस मैचौ मैं भी जान डाल देते थे। १५-१५ मिनट के अन्तराल के बाद हिन्दी कमेंट्री प्रसारित होती थी। कमेंट्री केदौरान मझे अभी भी याद है की ऐसा लगता ही नही था की हम मैच नही देख रहे हैं। जिवंत प्रसारण की बेजोड़ मिसाल थे ये दोनों।

इन्ही से प्रेरित होकर मैंने एन.सी.सी की परेड व स्कूल और कॉलेज मैं कमेंट्री की और मंच संचालन भी किया।आकाशवाणी पर मेरे द्वारा कुछ साक्षात्कार अथवा सामयिक विषयों पर कार्यक्रम भी प्रसारित होते रहते हैं।

पर इन दोनों को सुनकर ही क्रिकेट के प्रति रुझान हुआ और फिर तो इस खेल का शौक सिर चढ़कर बोलने लगा।

समय बदला, इस खेल का स्वरुप बदलता चला गया। खेल में 'रोष' ने जनम लिया...'रोष' बड़ा होकर 'नैराश्य' मेंबदला और फिर 'आक्रामक' हो चला।

इस समय यह आक्रामक व्यव्हार चर्चा और चिंता दोनों का विषय बन चुका है। हर मैच में 'नोक-झोंक' क्रिकेट काअभिप्रयाय बन चुका है। बचकानी हरकतें करना खिलाड़ियों की अदा बन चुकी है। गेंदबाज़ लगभग हर गेंद परछीटा-कशी करने से बाज नही आते और गेंद की पिटाई होने पर अपनी झेंप मिटाते हुए बडबडाना भी नहीभूलते...जोकि आक्रोश को बढ़ावा देने का आसन साधन है। अच्छे शाट पर तारीफ करना तो जैसे बीते वक्त की बातहो।

क्रिकेट एक उग्रवाद की तरफ़ बढ़ता जा रहा है। पर इस उग्रवाद को यहीं थामना होगा, नही तो वो दिन दूर नही जबक्रिकेट का मैदान एक घमासान युद्धस्थल बन जाएगा। खिलाड़ी अपने हाथों में बल्ले और विकेटों से ही फ़ैसला करलिया करेंगे, क्योंकि आक्रोश के चलते अंजाम याद नही आता।

मैं अपने 'प्यार' का मखोल उड़ते कैसे देखता रहूँ? क्या आप देख सकेंगे?

अपने लेखक और पाठक मित्रो के साथ हमराह होना चाहता हूँ।

तो दोस्तों, मैं संजय अवस्थी उर्फ़ 'किंका' जिसे क्रिकेट से बेहद प्यार है इस लेख के माधयम से आपकी ब्लॉग मण्डली में शामिल होने के लिए पहला कदम उठा रहा हूँ। आशा करता हूँ के आपसे मुझे परिवार के सदस्यों की तरह स्नेह मिलता रहेगा ताकि मैं भी आपके विचारों को ग्रहण कर सकूं और अपने दिल की बात कह सकूं।

क्रिकेट में बढ़ते उग्रवाद पर मेरी चिंता पर आपके सुझावों का स्वागत है।

प्रतीक्षा में...

आपका किंका

36 comments:

Straight Point said...

i sincerely hope the wait was worth it...will be looking fwd to the comments and suggestions with much anticipation...

thank you in advance...

Soulberry said...

I'm floored. How did you do it Pankaj? And welcome Sanjay Awasthi.

I agree with you, Indians are lucky that they can, if they wish to, speak in over 3000 languages. Even the mainstream ones would number a significant figure. And mind you, they include Englaish which is now very much a part of the nation.

How did you do it?

Unicode? That must have been laborious... Enjoyed.

Straight Point said...

thank you very much SB!! yes it was an effort worth taking it...

the blogger provides the option at setting > basic to enable translation from english to hindi or any regional language of your choice...

if you enable it then the text editor shows the icon of selected language and then you have to write the word in the required sound

e.g. mein bhi hindi main likhna chahata hoon...

and it will convert it into exact hindi...taking the sound form of word you type...

cool isn't it...?

Soulberry said...

Oh Ok...it goes my vowels. The word is split around a vowel while leaving whitespace as it is.

But I tell you this is fabulous and unexpected :)

Let me check that out...will save a lot of headache for short pieces in future. I got lost in that Unicode business for a four line stanza!

Straight Point said...

yes...

i think you are talking about bhagwat gita shloka in yuvi post?

Trideep said...

namaste awasthi ji aur aapka blogosphere mein hardik swagat hai.

Trideep said...

SP,

Congrats for being a man!!

Straight Point said...

hardik dhanyawad tri...

without being modest...to be honest...i would say that there is nothing manly about this...its like awakening to reality that we do have many untapped audience who wanted their voice being expressed on blog too...and what better then cricket to connect them the blogsphere...

thanks to SB for making me realize this very evident truth...

A Bisht said...

सन्जय अवस्थी जी,
आपका क्रिकेट ब्लागर्स के परिवार मे स्वागत है । आपको आग्रह करने की आवश्यकता नहीं, हमारे स्नेह पर आपका अधिकार है।
आप एक ऐसी भाषा के माध्यम से अपनी बात कह रहे हैं जो सुंदर होने के साथ, रचनात्मक भी है। अंग्रेजी यदि वैश्विक भाषा है, तो हिन्दी एक विशिष्ट भाषा है।
आप खुलकर अपनी बात कहेँ, मैं और इस विश्व के कोटि-कोटि हिन्दी भाषी पाठक आपके लेखों का उत्सुकता से प्रतीक्षा में हैं ।
शुभेच्छु
अ बिष्ट

A Bisht said...

SP

I'm least surprised, as I know you are a man of initiative.

with best wishes

Wasim said...

I asked you is it a feature a person or a character?
I was thinking you must be starting video streaming or fantasy cricket.

congratulations on your achievement, but Damn it I won't be able to read anything.

Soulberry said...

How are you guys doing it in the comments as well?

England off to a rip-roaring start.

Kinka said...

Dear Soulberry,

thanks a ton for welcoming and quick response. It was all pankaj's inspiration. who encouraged me to do it..and i am giving it a try...

Straight Point said...

प्रिय बिष्ट

हार्दिक धन्यवाद्।

में सिर्फ़ इतना कहना चनूंगा की गुणि जानो के संग में साधारण मनुष्य भी असाधारण कार्य कर जाता है। :)

Straight Point said...

thanks wasim bhai...

but is there some problem that you cant read it? pls advise so that i can fix it

Straight Point said...

SB...

use hindi text translator of google and cut and paste your comment on comment box! simple... :)

yes englanf off to good start...but india is slowly clawing back...

thats what i meant of pitch...where putting 250ish score is testing...

if yuvi can get it thru i would rate this innings of his better than his ton...

Sanjay Awasthi said...

प्रिय ट्रईडीप जी
स्वागत के लिए बहुत बहुत धन्यवाद. आप सभी के साथ जुड़कर गोर्वान्वित महसूस कर रहा हूँ लिखने मे ग़लतियाँ भाषा परिवर्तन सॉफ्टवएयर के कारण हो रहीं हैं. आशा है आप अन्यथा न लेंगे

Sanjay Awasthi said...

प्रिय बिष्ट जी,

आपने अतिविशिष्ट अंदाज से जो सुखद शब्दों की वर्षा की है, सचमुच सराहनीय है.
आप ब्लॉग लेखकों एवम् टिप्पणीकारों के बीच स्वयं को जोड़ना एक सुखद अनुभव है.
मेरा भी यह प्रयास है की हम हिन्दी भाषा भी प्रचलन में रहनी चाहिए. हिंदीमुझे भी समय समय पर आपके विचारों का इंतजार रहेगा.
सादर एवम् साधुवाद

Kinka said...

Pan, I am planning to abother post, pl let me know how i can post it myself..

Straight Point said...

will mail you the procedure kinka...

scorpicity said...

Wow... this is a first all right!

one complaint though... you might have to increase the font-size of hindi text... tough to read for the slow ones like me :)

Wasim said...

Pankaj I can read and write Urdu but can't read and write Hindi, I am sure Q will have the same problem,
Either write your post in English and Hindi or else we will have to use Google translator which is sometimes not so correct and also takes some extra work.

rs said...

I am really slow reader as well. Perhaps you can try a larger font, or an option to read it in English :)

Straight Point said...

thanks scorpy!

i dont know if it first elsewhere but here at straight point it certainly is :)

thanks for the suggestion...i will correct this niggle...very soon...

Straight Point said...

wasim bhai...

jaldi seekh lijiye kyonki kinka ji abhi bahut lekh likhne waale hain... :)

Straight Point said...

thanks for the suggestion RS!

i will try to find the solution to it...till then i guess you will have to live with google translator... :)

Q said...

Oh man! I can't understand a word :-/

Straight Point said...

Q...

bear with this teething problem while i find a way to fix this up... :)

Naked Cricket said...

Likhte chalo!

Abhi said...

@-Kinka,
I appritiate that you have joined a blog of your immense intrest and along with that you are encouraging hindi, it will also become an inspiration for other people also... all the best!

Abhi.

Damith S. said...

way to alienate me bro.

fine, im gonna start writing in sinhalese. see how you like that sp !!

Straight Point said...

hahaha DS!! i can feel your pain...

you wont have any problem now onwards...

Urvashizone said...

Its good that somebody is writing in Hindi.Hindi is our mother tongue & we should not forget this.Other than Hindi people shuld be proud of there mother language.Regarding your comments its true that we alway look at front irresisting what is behind which making the front poopular.
Hope you will write some more true in future.best of Luck

Straight Point said...

a warm welcome and thanks urvashi...hope you will keep dropping by...

now that we have started it we will try our best to keep it up...

Kinka said...

Welcome Urvashi,

Thanks you for all the encouraging words. will keep posting in हिन्दी

Anonymous said...

You can also use www.hindieditor.com to write in hindi.

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